March 3, 2024

नई दिल्ली। हरियाणा के नूंह जिले में हुई सांप्रदायिक हिंसा को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के जाट किसानों और मुसलमानों को एक बार फिर से सोचने पर विवश कर दिया है। मेवात की हिंसा जिस तरह से भड़की और उसमें संघ-भाजपा से जुड़े संगठनों की संलिप्तता जिस प्रकार देखी गई, उसे लेकर समाज में विचार-विमर्श और सर्व धर्म सम्मेलन शुरू हो गए हैं। किसान संगठनों और जाट नेताओं ने राजनेताओं के इशारे पर होने वाले सांप्रदायिक दंगों से अपने समुदाय को दूर रखने की कोशिश शुरू कर दी है।

हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान संगठनों और किसानों के एक बड़े हिस्से ने आरोप लगाया है कि संघ-भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए नफरत फैलाने में लगी है और पिछले सप्ताह नूंह जिले में हुई सांप्रदायिक हिंसा में संघ-भाजपा के लोग खुले तौर संलिप्त देखे गए।

दरअसल, 2013 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में दंगों के बाद भाजपा जाट समुदाय और मुसलमानों के बीच विभाजन का लाभ उठाने में सफल रही थी। तब हुई झड़पों में कम से कम 62 जाट और मुसलमान मारे गए थे। संघ-भाजपा उसी तरह का प्रयोग हरियाणा में करना चाह रही है, क्योंकि राज्य में मनोहर लाल खट्टर सरकार बहुत अलोकप्रिय हो गई है।

हालांकि, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट और किसान पिछले कुछ वर्षों से नरेंद्र मोदी सरकार का विरोध कर रहे हैं और विपक्ष के साथ साझा मुद्दा बना रहे हैं। हरियाणा में, जाट एक शक्तिशाली मतदाता होने के साथ ही महत्वपूर्ण सामाजिक लॉबी भी है। जिसने नूंह हिंसा के दूसरे दिन उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को प्रशासन पर तीखे सवाल उठाने के लिए विवश कर दिया।

इस पृष्ठभूमि में किसान नेता राकेश टिकैत ने एक स्थानीय टीवी चैनल से कहा कि “सरकार धार्मिक आधार पर विभाजन पैदा करना चाहती है। देश में दंगे कराना सरकार की नीति है। वे लोगों का ध्रुवीकरण करने में व्यस्त हैं क्योंकि वे जानते हैं कि इससे उन्हें आगामी चुनाव में अधिक वोट पाने में मदद मिलेगी।”

हिंसा वाले दिन धार्मिक रैली में भाग लेने वाले हिंदुत्व समूहों के सशस्त्र सदस्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि “यह सुनिश्चित करना सरकार की नीति है कि ऐसी हिंसा हो। अब वे इसके लिए पुलिस अधिकारियों को दोषी क्यों ठहरा रहे हैं? यह उनकी नीति रही है।”

टिकैत ने कहा, पिछले दो सालों से हिंदुत्व समूह नूंह के मेवात क्षेत्र में धार्मिक रैली निकाल रहे हैं। “वे पिछले दो वर्षों से ऐसा कर रहे हैं क्योंकि वे तनाव पैदा करना चाहते हैं, यह अच्छी तरह से जानते हुए कि नूंह एक अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र है। भाजपा द्वारा धार्मिक आधार पर विभाजन पैदा करके देश के सामाजिक ताने-बाने को नष्ट करने की एक बड़ी साजिश रची गई है।

टिकैत ने कहा कि “पुलिस को दंगाइयों पर नकेल कसने की खुली छूट नहीं दी गई। जब सरकार चाहती है कि ऐसी सांप्रदायिक हिंसा हो, तो इसे कोई नहीं रोक सकता। पुलिस वही करती है जो उसे उसके राजनीतिक आकाओं ने कहा होता है। यह सरकार की नीति है क्योंकि वे दंगे कराकर सत्ता में बने रहना चाहते हैं और उन्हें देश की सबसे कम परवाह है।”

हरियाणा में जाट और किसान समूह के प्रतिनिधि इंद्रजीत तोमर ने कहा कि भाजपा अपनी घटती लोकप्रियता के कारण हरियाणा में हताश हो गई है। पिछले विधानसभा चुनाव-2019 में बीजेपी को सरकार बनाने के लिए दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी पर निर्भर रहना पड़ा था।

उन्होंने आगे कहा कि “वे बहुत हताश हो गए हैं क्योंकि मौजूदा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर बहुत अलोकप्रिय हैं। किसान विरोधी नीति के कारण जाट समुदाय भी पार्टी के खिलाफ हो गया है और यही कारण है कि समुदाय ने पिछले साल किसान आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”

खट्टर को एक ऐसे राजनेता के रूप में देखा जाता है जिसकी हरियाणा में कोई वास्तविक राजनीतिक जड़ें नहीं हैं लेकिन उन्हें मोदी का समर्थन प्राप्त है।

तोमर ने कहा कि “हमने नूंह में जो देखा वह लोकसभा चुनाव से पहले आने वाले महीनों में देश के अन्य हिस्सों में दोहराया जाने वाला है। भाजपा जानती है कि केवल ध्रुवीकरण ही उन्हें चुनाव में बचाएगा क्योंकि वे अपने वादे पूरे करने में विफल रहे हैं। ”

एक अन्य किसान नेता ने कहा कि भाजपा-आरएसएस पिछले कुछ वर्षों से मेवात क्षेत्र को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश कर रही है, जहां मुस्लिम आबादी काफी है। “विपक्षी दलों के गठबंधन के बाद वे अब हताश हो गए हैं और अब सोचते हैं कि अगले साल के आम चुनाव और हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले केवल ध्रुवीकरण ही उन्हें सत्ता में आने में मदद करेगा।”

किसान समूहों को डर है कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों के साथ सीमा साझा करने वाले हरियाणा में हिंसा का असर सीमावर्ती राज्यों पर भी पड़ सकता है।

पिछले हफ्ते हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद हरियाणा के नूंह में “बुलडोजर न्याय” पर स्वत: संज्ञान लेते हुए, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सोमवार को सरकार से अगले आदेश तक “अवैध निर्माण” के विध्वंस अभियान को रोकने के लिए कहा। अदालत ने प्रभावित पक्षों को कोई नोटिस दिए बिना हरियाणा सरकार के अभियान पर सवाल उठाया।

उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप तब आया जब विध्वंस अभियान पांचवें दिन में प्रवेश कर गया। पिछले चार दिनों में, जिला प्रशासन ने 700 से अधिक इमारतों, संरचनाओं और झोपड़ियों को ध्वस्त कर दिया है, जिनमें से ज्यादातर मुसलमानों की थीं। कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद नूंह जिले के अधिकारियों ने अधिकारियों से बुलडोजर कार्रवाई रोकने को कहा।

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