May 25, 2024

देहरादून/मसूरी। घोटालेबाजी को लेकर कुख्यात मसूरी के नगर पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता के कारनामें थमने के नाम नहीं ले रहे हैं। अब एक और करोड़ों का फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। इस फर्जीवाड़े की जांच में जो तथ्य सामने आये हैं उससे पता चलता है कि अनुज गुप्ता और अब उसकी सागर्दी में अधिशासी अधिकारी राजेश नैथानी जैसे लोग किस तरह भ्रष्टाचार में गले तक डूबे हुए हैं।

एक ओर जहां करोड़ों के टेंडर घोटालों को लेकर शासन द्वारा जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद भ्रष्ट पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता, ईओ यूडी तिवारी, ईओ राजेश नैथानी समेत पांच लोगों को चार्जशीट जारी कर दी हैं,। देहरादून निवासी शेखर पाण्डेय की शिकायत पर कुछ माह पूर्व शासन ने मसूरी नगर पालिका में नियम विरूद्व हुए करोड़ों के घोटालों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता समेत पांच अधिकारी व कर्मचारियों को भ्रष्टाचार का दोषी करार दिया है। शिकायतकर्ता शेखर पाण्डेय पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता के भ्रष्ट कारनामों के खिलाफ हाईकोर्ट में भी एक मामले में याचिकाकर्ता हैं। हाईकोर्ट के दखल के बाद मसूरी में एक पांच सात मंजिला बिल्डिंग को भी प्रशासन द्वारा सील कर दिया गया है।

वहीं अब भ्रष्टाचार का एक और नया मामला सामने आया है।   जिलाधिकारी ने मसूरी में 87 निविदाओं की जांच के लिए उपजिलाधिकारी नंदन कुमार की अध्यक्षता में पिछले दिनों दो सदस्यीय कमेटी गठित की थी। उपजिलाधिकारी ने मौके का निरीक्षण कर जो जांच रिपोर्ट तैयार की है वह हैरान करने वाली है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक नगर पालिका द्वारा 5 करोड 25 लाख की लागत से नगर पालिका क्षे़त्र में 84 निमार्ण कार्यों की निविदा प्रकाशित की। जब उपजिलाधिकारी ने मौके पर जाकर जांच की तो पता चला कि निविदा खुलने से पहले ही बहुत सारे कार्य ठेकेदारों द्वारा पहले ही पूरे कर लिए गए थे। जांच में यह भी पता चला कि कई कार्यों का इस्टीमेंट बढा-चढ़ाकर दिखाया गया है। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी धन की बंदरबांट व गबन की आशंका जाहिर करते हुए जिलाधिकारी से सभी निर्माण कार्यों की निविदा निरस्त करते हुए पालिका के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जिलाधिकारी के स्तर पर घोटालेबाजों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है तो वे इस घोटाले के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे।

जांच रिपोर्ट

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