March 3, 2024
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि फुटपाथ व्यवसायी समाज का वह महत्तपूर्ण हिस्सा है ,जो बिना‌ किसी सरकारी सहयोग के स्वयं एवं अपने परिवार का न केवल भरण पोषण करता है ,बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार देता है । फुटपाथ व्यवसायी उपभोक्ताओं को अन्य के मुकाबले सस्ते एवं सुगमता से जीवन से जुड़ी तमाम प्रकार की बस्तु उपलब्ध कराता है ।
 देश‌ व हमारे राज्य की आर्थिक प्रगति में उसका भी उतना ही योगदान है ,जितना कि किसी बड़े उधोगपति एवं अन्य कारोबारी का है । इस व्यवसाय से जुड़े लोग हमारी शहरी एवं कस्वाई आबादी के लगभग 3 प्रतिशत‌ हैं‌ जो‌ कि हमारी अर्थ व्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान देते आये हैं। अफसोस है कि 15 -15 घण्टे मेहनत करने के‌ बावजूद वे आज भी भारी उपेक्षित हैं ,वे सदैव स्थानीय निकाय ,पुलिस तथा दलालों के निशाने पर रहते हैं ,हरदिन इनसे चौथ‌ बसूली‌ आम बात है ।पिछले काफी दिनों से इन लोगों का करीबी से अध्ययन के बात पता चला है कि व्यवस्था की मनमानी से वे काफी आक्रोश में हैं ,कुण्ठित हैं कि वे अपना दुखडा़ किससे रोंयें ।देहरादून ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण प्रदेश में वे लगभग एक माह से अपने रोजगार के लिऐ दर दर भटक रहे हैं , किन्तु उनकी सुनने वाला कोई नहीं है ‌।
‌‌‌हमारे देश में सर्वप्रथम स्ट्रीट वेण्डर्स 1980 के दशक में बॉम्बे यूनियन बनाम बॉम्बे नगर निगम तत्पश्चात सोडान सिंह बनाम दिल्ली नगर निगम (1989) जैसे मामले से शुरू हुआ और अदालत में स्ट्रीट वैण्डर की दयनीय हाल पर ध्यान आकर्षित किया गया। गैंडा राम बनाम दिल्ली नगर निगम (2010), महाराष्ट्र यूनिट हॉकर्स यूनियन और अन्य बनाम ग्रेटर मुंबई नगर निगम (2002)आदि पर सुनवाई के बाद अन्तिम आदेश में, 9 सितंबर, 2013 को सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि “देश भर में काम करने वाले सभी स्ट्रीट वेंडरों/फेरी वालों को तब तक काम करने की अनुमति दी जाए जब तक कि वेंडिंग/हॉकिंग जोन के पंजीकरण और निर्माण की प्रक्रिया पूरी न हो जाये।” 2009 की नीति. एक बार यह प्रक्रिया पूरी तरह से हो जाने के बाद, वे केवल संबंधित टाउन वेंडिंग समिति के सुझाव/निर्देशों के अनुसार संचालन करने के लिए नामित होंगे।”स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका का संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का सादगी) अधिनियम, 2014,सोडान सिंह मामले में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि केंद्र सरकार ने शहरी स्ट्रीट वैन्डर्स पर राष्ट्रीय नीति 2009 तैयार करने और अंततः स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका का संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का निगम) अधिनियम 2014 अधिनियमित किया गया है। इस प्रकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय का उक्त निर्देश हमारे राज्य में भी प्रभावी है, जिससे मानने के लिऐ सरकार वाध्य है । अफसोसजनक बात है कि 14 साल बाद भी यह नीति हमारे राज्य में ठण्डे‌ बस्ते में है । हमारी राज्य सरकार व नौकरशाह राजनैतिक फायदे एवं खानापूर्ति के लिऐ फुटपाथ व्यवसायियों के लिऐ कम ब्याज वाले ऋण तो बांट रहे हैं ,किन्तु सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों का पालन यहाँ रतिभर भी नहीं हो रहा है, जिसमें उनके लिऐ बैन्डर जोन के तहत शहर एवं कस्वों में जगह का आवंटन ,जहाँ तमाम प्रकार की जन एवं स्वास्थ सुविधाऐं ,पार्किंग तथा उनके छोटे बच्चों के लिऐ पालना ,इसके साथ ही इनके सामाजिक सुरक्षा की गारन्टि हो ,जहाँ पर उनका रोजगार भी चल सके । इस ओर कोई प्रयास करती हुई नहीं दिख रही है ।ऐसे भी मामले प्रकाश में आये हैं कि फुटपाथ व्यवसायियों को कभी यातायात व्यवस्था के नाम पर ,तो कभी वीआईपी मूवैन्ट के नाम पर लठ्ठ के बल पर हटाया जाता रहा है ,जो कि सभ्य समाज में अशोभनीय व्यवहार ही कहा जायेगा ,यहाँ तक कि सरकारी लोगों तथा दलालों द्वारा उनसे चौथ बसूलना आम बात है ।यह भी संज्ञान में है कि उन्हें बेदखल करने में बड़े – बड़े संस्थान तथा ओनलाइन कम्पनियां संलिप्त है कि जो ऊंचे दाम पर सामग्री उपभोक्ताओं को बेचते आयें ,जबकि वही सामान फुटपाथ व्यवसायियों से आम जन सस्ते दामों में मिल जाता है ,इस सबके पीछे सरकार की कारपोरेट नीतियां भी जिम्मेदार हैं ,जिसका रूख गरीब एवं निम्न आय के लोगों के विरोध में है । आपको मालूम हो कि कूडे़ से लेकर साईन बोर्ड तथा छोटे बड़े घन्धों में बड़ी बड़ी कम्पनियां स्थानीय लोगों का रोजगार लगातार छीनने में लगी हैं । पिछले कई समय से राजधानी देहरादून सहित पूरे राज्य में डण्डे के बल पर फुटपाथ रेहड़ी ,पटरी व्यवसायियों को घर बिठा रखा है ,जो सरकार से लेकर प्रमुख राजनैतिक दलों तथा चुने हुऐ जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में है, किन्तु उनको आबादी के इस बड़े हिस्से की रतिभर भी प्रभाव नहीं है,वे इस तबके को अपने लिऐ वोट बैंक तो मानते हैं ,किन्तु सही मायनों में वे इनके हितैषी नहीं है ।
इसलिये तमाम प्रतिबद्धताओं एवं कष्टों के बावजूद अपने अधिकारों‌ की मांगों के लिऐ एकजुटता के साथ फुटपाथ ,रेहड़ी तथा पटरी व्यवसायियों को आगे आना होगा ।हम इस लेख के माध्यम से निम्न तीन प्रमुख मांगों के प्रति‌ निम्नलिखित जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से न्यायोचित कार्यवाही की मांग करते हैं।
(1)फुटपाथ ,रेहड़ी ,पटरी व्यवसासियों का सभी प्रकार का उत्पीड़न बन्द हो‌।
(2) सभी फुटपाथ एवं रेहड़ी ,पटरी व्यवसायियों को सम्मानजनक जी वन जिने का अधिकार हो ।
(3) सर्वोच्च न्यायालय वेंडरजोन नीतियों को राज्य में शक्ति से लागू हो ।
प्रति :- महामहिम राज्यपाल उत्तराखण्ड शासन देहरादून।
माननीय मुख्यमंत्री जी उत्तराखण्ड सरकार देहरादून
माननीय शहरी विकास मन्त्रि उत्तराखण्ड सरकार देहरादून ।
(4) मुख्य सचिव महोदय उत्तराखण्ड शासन देहरादून ।
(5)माननीय अपर मुख्य सचिव ,माननीय मुख्यमंत्री जी उत्तराखण्ड सरकार देहरादून ।
(6)शहरी विकास सचिव उत्तराखण्ड शासन देहरादून ।
हम हैं आपके

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