July 2, 2026

गदरपुर (ऊधम सिंह नगर)। नगर पालिका परिषद गदरपुर में लगभग 8 करोड़ रुपये के सिविल निर्माण कार्यों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि बड़े निर्माण कार्यों को कथित रूप से छोटे-छोटे भागों में विभाजित कर बिना खुली एवं प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया अपनाए कार्य कराए जा रहे हैं।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि इन सभी कार्यों की कुल लागत को एक साथ देखा जाए तो यह लगभग 8 करोड़ रुपये होती है। उनका आरोप है कि कार्यों को छोटे-छोटे पैकेजों में विभाजित कर निविदा प्रक्रिया से बचने का प्रयास किया गया, जिससे पारदर्शिता एवं प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन कार्यों के लिए नगर पालिका द्वारा पूर्व में निविदाएं जारी की गई थीं, लेकिन नगर क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा प्रक्रिया पर आपत्ति और विरोध दर्ज कराने के बाद अधिशासी अधिकारी एवं पालिकाध्यक्ष द्वारा बिना सार्वजनिक कारण बताए उन निविदाओं को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद कथित रूप से उन्हीं अथवा समान प्रकृति के कार्यों को छोटे-छोटे भागों में विभाजित कर कराया जाने लगा।

मामले में यह भी मांग की गई है कि यह जांच की जाए कि कार्यों को विभाजित करने का निर्णय किस आधार पर लिया गया, क्या इसके लिए सक्षम स्तर से स्वीकृति प्राप्त थी तथा क्या पूरी प्रक्रिया उत्तराखण्ड अधिप्राप्ति नियमावली एवं लागू वित्तीय नियमों के अनुरूप अपनाई गई।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कार्यों के कृत्रिम विभाजन से सरकारी खरीद नियमों की मूल भावना को दरकिनार किया गया है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता तथा संभावित गबन की आशंका उत्पन्न होती है। शिकायतकर्ताओं ने अधिशासी अधिकारी एवं पालिकाध्यक्ष की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी, शहरी विकास विभाग एवं सतर्कता विभाग से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा जांच पूर्ण होने तक संबंधित कार्यों और भुगतानों पर रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी धन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का हो सकता है।

शिकायतकर्ताओं ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय जांच कराने, जांच पूरी होने तक संबंधित कार्यों एवं भुगतानों पर रोक लगाने तथा यदि जांच में किसी अधिकारी या संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी स्थापित होती है तो उनके विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं विधिक कार्रवाई करने की मांग की है।

“उल्लेखनीय है कि उक्त कार्यों के संबंध में नगर पालिका परिषद गदरपुर द्वारा पूर्व में निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। तथापि, निविदा प्रक्रिया के संबंध में नगर क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जागरूक नागरिकों द्वारा उठाई गई आपत्तियों एवं विरोध के पश्चात अधिशासी अधिकारी एवं पालिकाध्यक्ष द्वारा बिना किसी स्पष्ट एवं सार्वजनिक कारण बताए उक्त निविदाओं को निरस्त (Cancel) कर दिया गया। इसके उपरांत उन्हीं अथवा समान प्रकृति के कार्यों को कथित रूप से छोटे-छोटे भागों में विभाजित कर निष्पादित किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है, जिससे संपूर्ण प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं वैधानिकता पर गंभीर प्रश्नचिह्न उत्पन्न होते हैं। यह भी जांच का विषय है कि पूर्व में जारी निविदाओं को किन परिस्थितियों एवं किस प्रशासनिक औचित्य के आधार पर निरस्त किया गया तथा बाद में कार्यों को विभाजित कर कराए जाने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया।”

इस मामले में विस्तृत अभिलेख प्राप्त करने के उद्देश्य से सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आरटीआई आवेदन भी दायर किया गया है। आवेदन में पूर्व में जारी एवं बाद में निरस्त किए गए टेंडरों, अखबारों में प्रकाशित निविदा विज्ञप्तियों, कार्य विभाजन के आदेशों, स्वीकृतियों, कार्यादेशों, भुगतान अभिलेखों तथा फाइल नोटिंग सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की मांग की गई है।

सूत्रों एवं शिकायतकर्ताओं के अनुसार, मामले में शिकायतें दर्ज होने के बावजूद नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी द्वारा कथित रूप से संबंधित टेंडरों को खोलने तथा चयनित फर्मों के पक्ष में वर्क ऑर्डर जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि यह तथ्य जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल पारदर्शी निविदा प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही एवं वित्तीय नियमों के पालन की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक होगी।

शिकायतकर्ता ने मामले को गंभीर बताते हुए उत्तराखण्ड के मुख्य सचिव, सचिव शहरी विकास विभाग तथा निदेशक शहरी विकास को भी विस्तृत शिकायत भेजी है। शिकायत में पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच, संबंधित कार्यों पर रोक, तथा जांच में आरोप सिद्ध होने की स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी विभागीय एवं विधिक कार्रवाई की मांग की गई है।

नगर पालिका परिषद गदरपुर का पक्ष इस समाचार के प्रकाशन तक उपलब्ध नहीं हो सका। यदि संबंधित अधिकारी या पालिका प्रशासन इस विषय में अपना स्पष्टीकरण जारी करता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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