April 30, 2026

उत्तराखण्ड में फर्जी डिग्री बनाकर नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ गत दो सालों में हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही जांच के बाद अब तक करीब दो दर्जन शिक्षक बर्खास्त हो चुके हैं। रूद्रप्रयाग जनपद में ही दस से अधिक शिक्षकों को नौकरी से निकाला जा चुका है। हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही जांच के बाद शिक्षा विभाग में तो ऐसे फर्जी शिक्षक पकड़ में आ रहे हैं, लेकिन गड़बड़झाला कर नौकरी हासिल कर सरकार की आंखों में धूल झोंकने वालों की कमी नहीं है। सरकार के कई और विभागों/प्राधिकरणों व निगमों में एसे फर्जीवाड़ा कर कई चेहरे प्रमोशन पाकर अधिकारी की कुर्सी तक जा पहुंचे हैं।

उत्तराखंड सरकार द्वारा फर्जी डिग्री धारक शिक्षकों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत रुद्रप्रयाग जिले के 10 शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है। एसआईटी जांच में जिले के 19 शिक्षकों की डिग्री फर्जी पाई गई थी। विभाग द्वारा इनमें से दस के खिलाफ बृहस्पतिवार को बड़ी कार्रवाई की गई। जबकि नौ शिक्षकों के विरुद्ध जांच चल रही है।

एसआईटी प्रभारी मणिकांत मिश्रा के नेतृत्व में गठित टीम ने प्रदेशभर में फर्जी डिग्री से नियुक्ति के मामले की जांच में रुद्रप्रयाग जिले के 19 शिक्षकों को भी पकड़ा है।

एसआईसी द्वारा फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग से सिफारिश के बाद निदेशालय द्वारा दस शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है।

डिग्री का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला

अन्य नौ फर्जी डिग्री धारक शिक्षकों के विरुद्ध जांच गतिमान है। इन सभी शिक्षकों द्वारा 1994 से 2005 के बीच बीएड की डिग्री लेने की बात कही गई है, लेकिन चौधरी चरण सिंह विवि में इन वर्षों के सत्र में इन शिक्षकों की डिग्री का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है।

इसके आधार पर इनकी डिग्री को फर्जी माना गया है। कुछ शिक्षकों द्वारा अपना दावा पेश करने के दौरान एसआईटी व विभागीय जांच को प्रभावित करने का प्रयास भी किया गया था।

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