July 11, 2026

पेट्रोलियम मंत्रालय और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा- इथेनॉल मिश्रित ईंधन से माइलेज में मामूली कमी संभव, इंजन को नुकसान होने के दावों को बताया गलत।

नई दिल्ली | 10 जुलाई 2026

केंद्र सरकार ने पहली बार स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E-20) के इस्तेमाल से कुछ वाहनों के माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। हालांकि, सरकार का कहना है कि E-20 ईंधन के पर्यावरणीय और आर्थिक फायदे इस नुकसान से कहीं अधिक हैं।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी विस्तृत स्पष्टीकरण में कहा गया है कि E-20 ईंधन बेहतर ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता, तेज़ दहन (Combustion), स्मूथ एक्सेलरेशन, इंजन की बेहतर सफाई और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे कई लाभ प्रदान करता है।

क्या बोले नितिन गडकरी?


केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी स्वीकार किया कि E-20 ईंधन के उपयोग से माइलेज में कुछ कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि इसका कारण पेट्रोल और इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (Calorific Value) में अंतर है।

गडकरी के अनुसार, माइलेज केवल ईंधन पर ही नहीं बल्कि ड्राइविंग की स्थिति पर भी निर्भर करता है। भारी ट्रैफिक वाले शहरों में माइलेज कम हो सकता है, जबकि हाईवे पर लगातार गति से वाहन चलाने पर बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

इंजन को नुकसान की बात सरकार ने नकारी

सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही उन खबरों को खारिज किया है जिनमें दावा किया जा रहा है कि E-20 पेट्रोल से इंजन या उसके पुर्जों को नुकसान पहुंचता है।

मंत्रालय के अनुसार, E-20 को देशभर में लागू करने से पहले विभिन्न ऑटोमोबाइल कंपनियों और परीक्षण एजेंसियों द्वारा व्यापक परीक्षण किए गए थे। परीक्षणों में इंजन की मजबूती, ईंधन प्रणाली, जंग-प्रतिरोध, उत्सर्जन और प्रदर्शन की जांच की गई और कोई गंभीर तकनीकी समस्या सामने नहीं आई।

पुराने वाहनों पर भी सरकार का दावा

सरकार का कहना है कि पुराने वाहनों में भी E-20 से किसी बड़े नुकसान का प्रमाण नहीं मिला है। यदि कुछ पुराने मॉडलों में किसी पुर्जे पर मामूली प्रभाव पड़ता है, तो वाहन निर्माता कंपनियों को सर्विसिंग के दौरान ऐसे पुर्जे बदलने के निर्देश दिए गए हैं।

E-20 क्यों लागू किया गया?

सरकार के अनुसार, E-20 कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल को सस्ता करना नहीं, बल्कि—

कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना।
देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना।
किसानों की आय बढ़ाना।
पर्यावरण प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम करना।
सरकार का दावा: बड़ा आर्थिक लाभ

पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से अब तक—

1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई।
316 लाख टन कच्चे तेल के आयात में कमी आई।
952 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटा।
किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया।
अलग-अलग पेट्रोल उपलब्ध कराने की मांग खारिज

सरकार ने पेट्रोल पंपों पर एक साथ शुद्ध पेट्रोल, E-10 और E-20 उपलब्ध कराने की मांग को भी अस्वीकार कर दिया। मंत्रालय का कहना है कि इससे ईंधन आपूर्ति व्यवस्था जटिल होगी और लॉजिस्टिक्स लागत में भारी वृद्धि होगी।

 

 

 

 

 

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