38650 रूपये में खरीदा जा रहा एक बल्ब और 70 हजार रूपये में पोल
देहरादून। मध्य प्रदेश के शहरी निकायों में जहां एलईडी लाइट समेत अन्य सामग्री की खरीद में भ्रष्टाचार के कारनामों ने सरकारी धन की लूट के सवाल पर बहस गरम हो रखी है, वहीं अपने उत्तराखण्ड का हाल तो लगता है उससे भी बुरा है। भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का आलम यह है कि 50-50 फीसदी कमीशनखोरी के लिए नगर पालिकाओं में बैठे अधिशासी अधिकारी से लेकर शासन के अधिकारी तक आंख मूंद का जनता के धन की लूट को बेरोकटोक अंजाम दे रहे हैं। नगर पालिका विकासनगर में स्ट्रीट लाइट के नाम पर जिस तरह का नंगा खेल हो रहा है वह हैरान करने वाला है। कमीशनखोरी का आलम यह है कि एक स्ट्रीट लाइट का 200 वाट का बल्ब 38650 हजार रूपये में और पोल 70 हजार रूपये में खरीद हो रही है, जबकि बाजार में इस बल्ब की कीमती 3 हजार रूपये से भी कम है। इसी तरह बाजार में डेकोरेटिव पोल की कीमत 20 हजार रूपये से भी कम है उसे 70 हजार रूपये में खरीदा जा रहा है। इस तरह स्थापना के साथ 1 लाख 71 हजार रूपये प्रति पोल की दर से सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है।

अधिशासी अधिकारी द्वारा इस घोटाले को अंजाम देने के लिए बकायदा डीपीआर बनाकर शासन से योजना को मंजूर कराने के बाद आधा-अधूरा टेंडर भी जारी कर दिया गया है। मनचाहे ठेकेदार को टेंडर जारी करने के लिए जैम पर जो टेंडर जारी किया गया है उसमें डीपीआर में शामिल दो मुख्य आइटम स्ट्रीट लाइट बल्ब व पोल को गायब कर अन्य सामग्री व सिविल वर्क की ही दरें मांगी गई हैं।
नगर पालिका विकासनगर के अधिशासी अधिकारी द्वारा उडियापुर से बरोटीवाला मार्ग तक 42 पोल व राणा क्लिनिक आईकेयर सेंटर से होते हुए विकासनगर की सीमा तक 58 स्ट्रीट लाइट पोल की स्थापना के लिए मनमाने तरीके से डीपीआर तैयार कर उसे मंजूरी के लिए बकायदा शासन को प्रेषित किया गया। उत्तराखण्ड अधिप्राप्ति नियमावला को दरकिनार करते हुए मनमाने तरीके से स्ट्रीट लाइट बल्ब व पोल की दरें तय कर ली गईं। शासन में बैठे भ्रष्ट अफसरों ने भी डीपीआर में तय किए गए आइटम की दरों की जांच करने के बजाय आंख मूंदकर डीपीआर को मंजूर कर लिया गया। आलम यह है कि 100 स्ट्रीट लाइट बल्ब की खरीद के लिए 38 लाख 56 हजार रूपये और 100 पोल के लिए लिए 70 लाख रूपये में खरीदने की तैयार की जा रही है। इस तरह आर्मड केबल व अन्य सामग्री के साथ स्थापना के माम पर 1 लाख 71 हजार रूपये प्रति पोल की दर से सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है। इस घोटाले का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शासन द्वारा हरिद्वार की लढौरा नगर पालिका के लिए इसी तरह के डेकोरेटिव स्ट्रीट लाइट पोल की खरीद व स्थापना के लिए 80 हजार रूपये प्रति पोल की दर से डीपीआर मंजूर की गई है। अब सवाल यह उठता है कि एक नगर पालिका में वहीं कार्य 80 हजार रूपये में किया जा रहा है, जबकि दूसरे ओर नगर पालिका विकासनगर में उसी कार्य व सामग्री की खरीद के लिए प्रति पोल की दर 1 लाख 71 हजार रूपये की स्वीकृति की जा सकती है। जाहिर है कमीशनखोरी के लिए इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है।
जब राज्य में चुनावी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं तब यह घोटाला न केवल सफाई निरीक्षक से अधिशासी अधिकारी की कुर्सी पर बैठै मनोज बिष्ट के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरों टालरेंस का ढोल पीटने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए भी इस सवाल का जबाव देना मुश्किल होगा कि आखिर शहरी विकास विभाग में हो रही लूट किसके शह पर हो रही है।
