April 17, 2024

SBI had filed an application to extend time to disclose the details of each electoral bond encashed by political parties till June 30 | PTI/Shutterstock

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई के उस आवेदन को ख़ारिज कर दिया, जिसमें उसने इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी देने का समय बढ़ाने की मांग की थी. इलेक्टोकल बॉन्ड की जानकारी को सार्वजनिक करने के लिए एसबीआई ने 30 जून तक का समय मांगा था.

इससे पहले पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया जो इलेक्टोरल बॉन्ड बेचने वाला अकेला अधिकृत बैंक है, उसे निर्देश दिया था कि वह छह मार्च 2024 तक 12 अप्रैल, 2019 से लेकर अब तक ख़रीदे गए इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी चुनाव आयोग को दे.

इसी मामले में एसबीआई ने जानकारी देने की तारीख़ 30 जून कर बढ़ाने की मांग की थी.

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि एसबीआई को 12 मार्च 2024 तक जानकारी देनी होगी और चुनाव आयोग को यह जानकारी अपनी वेबसाइट पर 15 मार्च, 2024 को शाम पाँच बजे तक जारी करनी होगी.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील हरिश साल्वे एसबीआई का पक्ष रख रहे थे.

वहीं पूर्व क़ानून मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के साथ जाने-माने वकील प्रशांत भूषण एडीआर की ओर से पैरवी कर रहे थे.

एडीआर ने एसबीआई को और समय देने की मांग करने वाली याचिका के ख़िलाफ़ अवमानना याचिका दायर की थी.

मामले की सुनवाई चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीरआर गवई, जस्टिस जबी पार्दीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने की.

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद प्रशांत भूषण ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “कोर्ट ने कहा कि डोनर्स की जानकारी और पार्टियों ने जो चंदा भुनाया उसकी जानकरी देनी है. एसबीआई कह रहा था कि उन्हें क्रॉस मैचिंग करनी है. कोर्ट ने कहा कि जो डेटा आपके पास उपलब्ध है, उसे जारी कर दीजिए. इसे मिलाने की कोई ज़रूरत नहीं है. ”

आरटीआई कार्यकर्ता और इलेक्टोरल बॉन्ड पर काम करने वालीं अंजली भारद्वाज ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए लिखा, “सुप्रीम कोर्ट अपने मूल फ़ैसले पर कायम है, जिसमें ख़रीदे गए और भुनाए गए इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी- नाम, धनराशि और तारीख़ों को जारी करने का आदेश दिया था. एसबीआई 2024 के चुनावों से पहले डोनर्स के के नामों का सार्वजिनक करने से बच रहा था. सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को कोर्ट की अवमानना का मामला चलाने की चेतावनी दी है.

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